Friday, 5 August 2016

केजरीवाल ने वो सीढ़ी ही तोड़ दी, जिसके सहारे वो राजनीति में आए.. कामयाब हुए 
अमेरिका के मशहूर विचारक स्वेट मार्डन की किताब में पढ़ा था कि
जरा शक्लें देखिए.. ये वही हैं जो अब धरने पर बैन लगा
उसकी वकालत भी कर रहे हैं. 
जब आप एक सीढ़ी क्रॉस कर लो तो उसे तोड़ दो ताकि फिर उससे वापस न जा सको। ऐसे में आप आगे बढ़ोगे या फिर आगे बढ़ना ही आपकी मजबूरी बन जाएगी और फिर कामयाबी मिल जाएगी..
मगर, राजनीति के नए स्वयंभू सूरमा अरविंद केजरीवाल भी कुछ इसी राह पर चले लेकिन थाेड़ा अलग ढंग से। दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर धरना लगाने पर बैन लगा दिया।
अब जरा पीछे चलें... 5 अप्रैल 2011 सशक्त लोकपाल कानून के लिए अन्ना हजारे ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। बाकी कार्यकर्ताओं के साथ अरविंद केजरीवाल भी जुड़े। धरना लगता रहा। इसी धरने से लोकपाल कानून तो नहीं मिला लेकिन महत्वकांक्षी अरविंद केजरीवाल ने नई राजनीतिक पार्टी को जन्म दे दिया। अन्ना हजारे तो वापस लौट गए लेकिन केजरीवाल धरनों की बदौलत आगे बढ़ते गए। आम आदमी पार्टी बनी।देश की राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के साथ क्षेत्रीय दलों से परेशान लोग उनसे जुड़े। केजरीवाल खुद फ्रीडम ऑफ स्पीच, फ्रीडम आफ एक्सप्रेशन जैसी बातें करते थे। ये वही केजरीवाल और उनकी सरकार है जिसने 2014 में दिल्ली पुलिस के 5 अफसरों को सस्पेंड करने की मांग को लेकर संसद के नजदीक रेल भवन के बाहर धरना लगा दिया था। यहां तक कि रिपब्लिक डे फंक्शन का बायकॉट व डिस्टर्प्ट करने की भी धमकी दी थी। आप वर्करों ने तब प्राइम मिनिस्टर के आवास के बाहर भी धरना दिया था।
मगर, अब एक नई तरह की राजनीति करते हुए दिल्ली में अपने घर के बाहर धारा 144 लागू करवा दी। कोई भी घर के बाहर धरना नहीं दे सकेगा। धरना मना है। अगर किसी ने धरना दिया, नारेबाजी की तो जेल होगी। सबको खामोश रहना होगा। जो केजरीवाल और उनकी सरकार कर रही, वही सही है.. बाकी सब गलत। कहते हैं आलोचना सुननी चाहिए, आलोचक हमारे अच्छे मित्र होते हैं। आपको उनसे पता चलता है कि कहां और क्या कमी है?। मगर, जब उनका ही गला घोंट दो तो फिर अादमी अपनी खुद के ख्यालों में बनाई जिंदगी में जीता है.. इसी खुशफहमी में मग्न रहता है और फिर उसे गलत नहीं दिखता..।
अंत में : केजरीवाल जी वो सीढ़ी तोड़ रहे हैं जिसके सहारे वो राजनीति में आए। दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। अब जब धरना ही नहीं होगा तो दूसरे केजरीवाल का जन्म नहीं होगा.. और इस तरह एक ही केजरीवाल राज करेगा..
#ArvindKejriwal #DelhiGovt #AamAadmiParty #U-Turn #DharnaManaHai 

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया विश्लेषण। केजरीवाल जब खुद कुछ करते हैं तो उन्हें सब बढ़िया लगता है लेकिन वही काम कोई दूसरा करता है तो उन्हें बड़ी दिक्कतें होती हैं। ऐसा नमूना आज तक नहीं देखा कभी।

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